नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA)ने शनिवार को हायर जुडिशरी में महिला जजों के कम प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया है। बार की शिकायत है कि सुप्रीम कोर्ट में और तमाम हाई कोर्ट में महिला जजों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने इसके लिए बाकायदा एक प्रस्ताव पारित किया है और देश के चीफ जस्टिस (CJI) बीआर गवई और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से इस दिशा में जल्द ध्यान देने का आग्रह किया है। बार ने सीजेआई और कॉलेजियम का ध्यान देश के उन उच्च न्यायलयों की ओर भी खींचा है, जहां एक भी महिला जज नहीं हैं।
महिला जजों को मिले उचित प्रतिनिधित्व
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से पारित प्रस्ताव में कहा गया है, 'चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और कॉलेजियम से यह अनुरोध किया जाता है कि आने वाले न्यायिक नियुक्तियों में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों में ही और महिला जजों को पदोन्नति दिए जाने पर तत्काल और उचित तरीके से विचार किया जाए।'
देश भर में महिला जजों का प्रतिनिधित्व कम
बार का कहना है कि यह बात ध्यान देने योग्य है कि उत्तराखंड, त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर जैसे उच्च न्यायालयों में महिला जज नहीं है। यही नहीं, पूरे देश के हाई कोर्ट में जजों के लगभग 1,100 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 670 पदों पर पुरुष हैं और मात्र 103 जज ही महिला हैं। बाकी पद खाली पड़े हुए हैं।
2021 से एक भी महिला जज की नियुक्ति नहीं
एससीबीए का कहना है कि 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन इसपर गहरी निराशा जाहिर करता है कि सुप्रीम कोर्ट में हुई हालिया नियुक्तियों में बार या बेंच से एक भी महिला जज को जगह नहीं दी गई, इस तथ्य के बावजूद कि साल 2021 के बाद से किसी भी महिला जज की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति नहीं हुई है। अभी सुप्रीम कोर्ट की बेंच में सिर्फ एक महिला जज सेवा दे रही हैं।'
हायर जुडिशरी में लैंगिक संतुलन पर जोर
बार का कहना है कि 'एससीबीए का यह दृढ़ विश्वास है कि बेंच में अधिक लैंगिक संतुलन न सिर्फ निष्पक्ष और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है, बल्कि जुडिशरी में जनता के भरोसे को मजबूत करने, न्यायिक दृष्टिकोण को विस्तार देने और न्याय की सर्वोच्च संस्था में हमारे समाज की विविधता को प्रतिबिंबित करने के लिए भी जरूरी है।' (पीटीआई इनपुट के आधार पर)
महिला जजों को मिले उचित प्रतिनिधित्व
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से पारित प्रस्ताव में कहा गया है, 'चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और कॉलेजियम से यह अनुरोध किया जाता है कि आने वाले न्यायिक नियुक्तियों में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों में ही और महिला जजों को पदोन्नति दिए जाने पर तत्काल और उचित तरीके से विचार किया जाए।'
देश भर में महिला जजों का प्रतिनिधित्व कम
बार का कहना है कि यह बात ध्यान देने योग्य है कि उत्तराखंड, त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर जैसे उच्च न्यायालयों में महिला जज नहीं है। यही नहीं, पूरे देश के हाई कोर्ट में जजों के लगभग 1,100 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 670 पदों पर पुरुष हैं और मात्र 103 जज ही महिला हैं। बाकी पद खाली पड़े हुए हैं।
2021 से एक भी महिला जज की नियुक्ति नहीं
एससीबीए का कहना है कि 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन इसपर गहरी निराशा जाहिर करता है कि सुप्रीम कोर्ट में हुई हालिया नियुक्तियों में बार या बेंच से एक भी महिला जज को जगह नहीं दी गई, इस तथ्य के बावजूद कि साल 2021 के बाद से किसी भी महिला जज की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति नहीं हुई है। अभी सुप्रीम कोर्ट की बेंच में सिर्फ एक महिला जज सेवा दे रही हैं।'
हायर जुडिशरी में लैंगिक संतुलन पर जोर
बार का कहना है कि 'एससीबीए का यह दृढ़ विश्वास है कि बेंच में अधिक लैंगिक संतुलन न सिर्फ निष्पक्ष और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है, बल्कि जुडिशरी में जनता के भरोसे को मजबूत करने, न्यायिक दृष्टिकोण को विस्तार देने और न्याय की सर्वोच्च संस्था में हमारे समाज की विविधता को प्रतिबिंबित करने के लिए भी जरूरी है।' (पीटीआई इनपुट के आधार पर)
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