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Bihar: कैमूर में कोर्ट का फैसला नहीं मानते अधिकारी! अंचल अधिकारी और BDO की मनमानी से एक परिवार प्रताड़ित

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कैमूर: बिहार सरकार एक तरफ जमीन सर्वे करा रही है, ताकि प्रदेश में जमीन विवाद को लेकर होने वाली घटनाओं पर लगाम लगे। दूसरी ओर अधिकारियों की लापरवाही से जमीन विवाद के मामले बढ़ रहे हैं। ताजा मामला बिहार के कैमूर जिले का है। जहां कोर्ट ने जमीन मालिक के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन जबरन उनकी जमीन पर अधिकारियों की लापरवाही की वजह से कब्रिस्तान की घेराबंदी का काम चल रहा है। मामला कैमूर जिले के चैनपुर थाना अंतर्गत खरीगवां गांव का है। इसी गांव के किसान अरुण कुमार की पुश्तैनी जमीन पर कुछ लोग साजिश के तहत कब्रिस्तान की घेराबंदी करा रहे हैं।





क्या है पूरा मामला

किसान के मुताबिक उनकी पुश्तैनी जमीन को कब्रिस्तान का हिस्सा बता कर घेराबंदी की जा रही है। हालांकि, वो कोर्ट से ये मामला जीत चुके हैं। कोर्ट ने उनके हक में फैसला दिया है। किसान का आरोप है कि गांव के मुखिया, प्रखंड विकास पदाधिकारी और चैनपुर प्रखंड के अधिकारी आपस में मिलीभगत करके जमीन को आम और गैरमजरूआ बनाकर उस पर निर्माण कार्य करा रहे हैं। किसान के मुताबिक ये जमीन तीस वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें हासिल हुई है। ये उनकी पुश्तैनी जमीन है। जिस पर किसी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता है। कानूनी लड़ाई में कोर्ट ने 31 जनवरी, 2020 को किसान अरुण कुमार के पक्ष में अपना फैसला दिया। कोर्ट ने बकायदा अपने आदेश में अरुण कुमार और उनके परिवार की जमीन बताया है।





दौड़ता रहा किसान

किसान के मुताबिक माननीय न्यायालय की ओर से जब अरुण कुमार के पक्ष में फैसला दिया गया। उसके बाद अरुण कुमार ने सीओ चैनपुर को कोर्ट की आदेशित प्रति दी। उसके बाद जमीन का स्वरूप बदलने, म्यूटेशन करने और लगान रशीद काटने का आग्रह किया। उसके बाद सीओ ने किसान की अपील को अनदेखा करते हुए भूमि अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत निर्गत कर कब्रिस्तान की घेराबंदी का दरवाजा खोल दिया। सीओ की ओर से कोर्ट के आदेश की अवहेलना की गई।



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स्थानीय लोगों में आक्रोश

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि निजी जमीन पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। ये बिल्कुल भी ठीक नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक ये सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश हो रही है। सीओ और प्रखंड विकास पदाधिकारी चाहेंगे, तो सही जमीन पर कब्रिस्तान की घेराबंदी हो सकती है। लेकिन उनके द्वारा आनन- फानन में निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण में जमकर धांधली हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले में जिलाधिकारी को हस्तक्षेप कर मामले को सुलझाना चाहिए। ये बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

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